नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक ने जेन ज़ी (15–30 वर्ष) के युवाओं को लेकर कहा है कि वे परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने वाले और भावुक होते हैं, लेकिन अक्सर “शांत दिमाग से नहीं सोचते।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवाओं को कोई बात वास्तविक और प्रामाणिक लगती है, तो वे उसकी ओर तेजी से आकर्षित होते हैं।
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने अपने संबोधन के दौरान सामाजिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़े आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला, लेकिन बाद में उसके समर्थकों को लगा कि वह गलत दिशा में चला गया और इससे समाज की एक-दो पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इन टिप्पणियों को हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए युवा आंदोलन की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस आंदोलन ने संघ परिवार के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि युवाओं के आक्रोश और मुखरता का समर्थन किया जाए या अनुशासन और वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका पर अधिक जोर दिया जाए।
ऑर्गनाइज़र ने जारी की समर्थकों की सूची
आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र ने सीजेपी के जंतर-मंतर आंदोलन का समर्थन करने वाली 11 सार्वजनिक हस्तियों की सूची प्रकाशित की है। पत्रिका के अनुसार, आंदोलन को विभिन्न क्षेत्रों की चर्चित हस्तियों के समर्थन से राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा मिली।
सूची में प्रमुख नामों में , , , , , , , , और शामिल हैं।
ऑर्गनाइज़र में प्रकाशित लेख में इन हस्तियों की भागीदारी को लेकर विभिन्न आलोचनात्मक टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। वहीं, इन व्यक्तियों या संगठनों के पक्ष और प्रतिक्रियाएं भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रही हैं।
यह मुद्दा अब राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय बन गया है, जिसमें अलग-अलग पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या और तर्क सामने रख रहे हैं।








